इजरायल और फिलिस्तीन के बीच का संघर्ष दुनिया के सबसे पुराने और जटिल भू-राजनीतिक विवादों में से एक है। यह केवल धर्म का मामला नहीं है, बल्कि मुख्य रूप से जमीन, संप्रभुता (Self-determination), और ऐतिहासिक पहचान का संघर्ष है।
इसके मूल कारणों को समझने के लिए हमें इसे कुछ मुख्य बिंदुओं में विभाजित करना होगा:
1. भूमि पर परस्पर विरोधी दावे (Conflicting Claims to Land)
यह इस विवाद की सबसे गहरी जड़ है। दोनों ही पक्ष एक ही भूखंड (ऐतिहासिक फिलिस्तीन/इजरायल की भूमि) पर अपना अधिकार जताते हैं:
- यहूदी पक्ष: उनका तर्क है कि यह उनकी पैतृक भूमि है, जहाँ से उन्हें रोमनों द्वारा निष्कासित किया गया था। 19वीं सदी के अंत में 'जायनवाद' (Zionism) आंदोलन के तहत यहूदियों ने अपनी ऐतिहासिक मातृभूमि में लौटने का प्रयास शुरू किया।
- फिलिस्तीनी पक्ष: उनका कहना है कि वे सदियों से इस जमीन पर रह रहे हैं और वे यहाँ के मूल निवासी हैं। वे इसे अपनी राष्ट्रीय पहचान और अस्तित्व का हिस्सा मानते हैं।
2. 1947 का विभाजन और 1948 का युद्ध
प्रथम विश्व युद्ध के बाद, यह क्षेत्र ब्रिटेन के नियंत्रण (British Mandate) में था। 1947 में संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इस क्षेत्र को दो राज्यों—एक यहूदी और एक अरब—में विभाजित करने का प्रस्ताव दिया।
- यहूदियों ने इसे स्वीकार किया, लेकिन अरब देशों और फिलिस्तीनियों ने इसे अपनी जमीन का बंटवारा मानकर खारिज कर दिया।
- 1948 का युद्ध: इजरायल द्वारा स्वतंत्रता की घोषणा के बाद युद्ध छिड़ गया। इजरायल ने यूएन द्वारा प्रस्तावित जमीन से अधिक क्षेत्र जीत लिया, जबकि जॉर्डन ने वेस्ट बैंक और मिस्र ने गाजा पर कब्जा कर लिया। इस दौरान लाखों फिलिस्तीनियों को विस्थापित होना पड़ा, जिसे वे 'नक्बा' (النكبة - तबाही) कहते हैं।
3. 1967 का 'छह दिवसीय युद्ध' (Six-Day War)
यह आधुनिक संघर्ष का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ था। इस युद्ध में इजरायल ने वेस्ट बैंक, गाजा पट्टी और पूर्वी यरुशलम पर कब्जा कर लिया।
- आज भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय इन क्षेत्रों को 'कब्जे वाले क्षेत्र' (Occupied Territories) मानता है।
- यहीं से फिलिस्तीनी राज्य की मांग और इजरायली बस्तियों (Settlements) के निर्माण का विवाद शुरू हुआ।
4. मुख्य वर्तमान विवाद (Final Status Issues)
शांति समझौतों (जैसे ओस्लो समझौता) के बावजूद, चार मुख्य मुद्दे आज भी समाधान की राह में बाधा हैं:
- यरुशलम (Jerusalem): दोनों पक्ष इसे अपनी राजधानी बनाना चाहते हैं। यहाँ यहूदियों का 'टेम्पल माउंट' और मुसलमानों की 'अल-अक्सा मस्जिद' जैसे पवित्र स्थल हैं, जिससे यह मामला भावनात्मक और धार्मिक बन जाता है।
- इजरायली बस्तियाँ (Settlements): वेस्ट बैंक में इजरायल ने कई बस्तियाँ बसाई हैं, जहाँ करीब 6-7 लाख यहूदी रहते हैं। फिलिस्तीनियों का मानना है कि ये बस्तियाँ उनके भविष्य के स्वतंत्र राज्य के गठन को असंभव बनाती हैं।
- शरणार्थियों की वापसी का अधिकार (Right of Return): लगभग 50 लाख से अधिक फिलिस्तीनी शरणार्थी (1948 और 1967 के विस्थापित) मांग करते हैं कि उन्हें उनके पुराने घरों में लौटने दिया जाए, जिसे इजरायल अपनी जनसांख्यिकीय सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।
- सीमाएं और सुरक्षा: फिलिस्तीन 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर पूर्ण संप्रभुता चाहता है, जबकि इजरायल सुरक्षा कारणों से रणनीतिक क्षेत्रों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है।
5. वर्तमान शासन और गुटबाजी
वर्तमान में फिलिस्तीन भी राजनीतिक रूप से विभाजित है:
- वेस्ट बैंक में 'फिलिस्तीनी अथॉरिटी' (फतह गुट) का शासन है, जो कूटनीति पर जोर देता है।
- गाजा पट्टी पर 'हमास' का नियंत्रण है, जो इजरायल के साथ सशस्त्र संघर्ष में विश्वास रखता है।
दूसरी ओर, इजरायल में सुरक्षा और बस्तियों के विस्तार को लेकर दक्षिणपंथी विचारधारा का प्रभाव बढ़ा है, जिससे 'दो-राज्य समाधान' (Two-State Solution) की संभावनाएं और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई हैं।
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