🇮🇳 भारत ने ईरान से तेल लेना क्यों बंद किया?
1️⃣ अमेरिका के कड़े प्रतिबंध (US Sanctions)
- 2018 में अमेरिका ने ईरान पर दोबारा सख्त प्रतिबंध लगाए (JCPOA परमाणु समझौते से बाहर निकलने के बाद)।
- शुरुआत में भारत सहित कुछ देशों को अस्थायी छूट (Waiver) मिली थी।
- मई 2019 में यह छूट समाप्त हो गई।
- इसके बाद ईरान से तेल खरीदने पर अमेरिकी दंड (secondary sanctions) का खतरा हो गया।
👉 भारत की कंपनियाँ और बैंक अमेरिका के प्रतिबंधों का जोखिम नहीं उठा सकते थे।
2️⃣ भुगतान की समस्या (Payment Problem)
- पहले भारत रुपये में भुगतान करता था, जो ईरान के लिए सुविधाजनक था।
- प्रतिबंधों के बाद:
- बैंकिंग चैनल बंद हो गए
- SWIFT सिस्टम से ईरान को बाहर कर दिया गया
- न पैसा भेजा जा सकता था, न बीमा मिल पा रहा था।
3️⃣ तेल टैंकर और बीमा संकट
- ईरानी तेल लाने वाले जहाजों को:
- अंतरराष्ट्रीय बीमा नहीं मिल रहा था
- बंदरगाहों पर रुकने में दिक्कत हो रही थी
- बिना बीमा जहाज चलाना बहुत बड़ा जोखिम होता है।
4️⃣ भारत–अमेरिका रणनीतिक संबंध
- भारत उस समय:
- रक्षा सौदे
- तकनीक
- वैश्विक राजनीति
में अमेरिका के साथ रिश्ते मजबूत कर रहा था।
- भारत नहीं चाहता था कि ईरान के कारण भारत-अमेरिका संबंध खराब हों।
5️⃣ वैकल्पिक आपूर्ति उपलब्ध हो जाना
- ईरान से तेल सस्ता था, लेकिन भारत ने विकल्प ढूंढ लिए:
- इराक
- सऊदी अरब
- यूएई
- बाद में रूस (2022 के बाद)
- इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा बनी रही।
❓ क्या भारत भविष्य में फिर ईरान से तेल ले सकता है?
हाँ, लेकिन शर्तों के साथ:
- अगर:
- अमेरिका-ईरान समझौता होता है
- प्रतिबंध हटते हैं
- तो भारत फिर से ईरान से तेल ले सकता है, क्योंकि:
- ईरानी तेल सस्ता और गुणवत्तापूर्ण है
- चाबहार पोर्ट जैसे रणनीतिक हित जुड़े हैं
🧠 संक्षेप में
👉 भारत ने इच्छा से नहीं, मजबूरी में ईरान से तेल लेना बंद किया।
मुख्य कारण था अमेरिकी प्रतिबंध और भुगतान-बीमा व्यवस्था का टूट जाना ।
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