शनिवार, 17 जनवरी 2026

भारत का ईरान से तेल ख़रीदना बंद क्यों किया?

🇮🇳 भारत ने ईरान से तेल लेना क्यों बंद किया?

1️⃣ अमेरिका के कड़े प्रतिबंध (US Sanctions)

  • 2018 में अमेरिका ने ईरान पर दोबारा सख्त प्रतिबंध लगाए (JCPOA परमाणु समझौते से बाहर निकलने के बाद)।
  • शुरुआत में भारत सहित कुछ देशों को अस्थायी छूट (Waiver) मिली थी।
  • मई 2019 में यह छूट समाप्त हो गई
  • इसके बाद ईरान से तेल खरीदने पर अमेरिकी दंड (secondary sanctions) का खतरा हो गया।

👉 भारत की कंपनियाँ और बैंक अमेरिका के प्रतिबंधों का जोखिम नहीं उठा सकते थे।


2️⃣ भुगतान की समस्या (Payment Problem)

  • पहले भारत रुपये में भुगतान करता था, जो ईरान के लिए सुविधाजनक था।
  • प्रतिबंधों के बाद:
    • बैंकिंग चैनल बंद हो गए
    • SWIFT सिस्टम से ईरान को बाहर कर दिया गया
  • न पैसा भेजा जा सकता था, न बीमा मिल पा रहा था।

3️⃣ तेल टैंकर और बीमा संकट

  • ईरानी तेल लाने वाले जहाजों को:
    • अंतरराष्ट्रीय बीमा नहीं मिल रहा था
    • बंदरगाहों पर रुकने में दिक्कत हो रही थी
  • बिना बीमा जहाज चलाना बहुत बड़ा जोखिम होता है।

4️⃣ भारत–अमेरिका रणनीतिक संबंध

  • भारत उस समय:
    • रक्षा सौदे
    • तकनीक
    • वैश्विक राजनीति
      में अमेरिका के साथ रिश्ते मजबूत कर रहा था।
  • भारत नहीं चाहता था कि ईरान के कारण भारत-अमेरिका संबंध खराब हों

5️⃣ वैकल्पिक आपूर्ति उपलब्ध हो जाना

  • ईरान से तेल सस्ता था, लेकिन भारत ने विकल्प ढूंढ लिए:
    • इराक
    • सऊदी अरब
    • यूएई
    • बाद में रूस (2022 के बाद)
  • इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा बनी रही।

❓ क्या भारत भविष्य में फिर ईरान से तेल ले सकता है?

हाँ, लेकिन शर्तों के साथ:

  • अगर:
    • अमेरिका-ईरान समझौता होता है
    • प्रतिबंध हटते हैं
  • तो भारत फिर से ईरान से तेल ले सकता है, क्योंकि:
    • ईरानी तेल सस्ता और गुणवत्तापूर्ण है
    • चाबहार पोर्ट जैसे रणनीतिक हित जुड़े हैं

🧠 संक्षेप में

👉 भारत ने इच्छा से नहीं, मजबूरी में ईरान से तेल लेना बंद किया
मुख्य कारण था अमेरिकी प्रतिबंध और भुगतान-बीमा व्यवस्था का टूट जाना ।

चाबहार पोर्ट -एक परिचय

चाबहार पोर्ट — एक परिचय
स्थान: ईरान के दक्षिण-पूर्व में सिस्तान-वालुचिस्तान प्रांत, ओमैन की खाड़ी के पास।
महत्त्व: भारत के लिए अफ़ग़ानिस्तान, मध्य एशिया और रूस तक पहुँच का सीधा मार्ग, जो पाकिस्तान को बायपास करता है। �
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🕰️ भारत की विगत (इतिहास) स्थिति
🇮🇳 रणनीतिक साझेदारी और विकास
दीर्घकालिक समझौता (10-साल का):
– मई 2024 में, भारत की आईपीजीएल (India Ports Global Ltd) ने ईरान के पोर्ट &मारिटाइम ऑर्गनाइज़ेशन के साथ 10-साल का वादे पर समझौता किया, जिसमें चाबहार पोर्ट के शहीद बिहेश्ती टर्मिनल का विकास और संचालन शामिल था। �
– इस समझौते में भारत ने लगभग $120 मिलियन निवेश + $250 मिलियन क्रेडिट सहायता देने का वादा किया। �
www.ndtv.com
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भू-राजनीतिक महत्व:
– यह समझौता भारत को पाकिस्तान से बायपास होते हुए अफ़ग़ानिस्तान, मध्य एशिया, और आगे रूस/यूरोप तक व्यापार, माल ढुलाई और कनेक्टिविटी के मार्ग खोलता है। �
– चाबहार पोर्ट अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (INSTC) का अहम हिस्सा है — जिससे माल का समय और लागत दोनों कम होता है। �
The Economic Times
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पूर्व व्यवसायिक उपयोग:
– पोर्ट ने पहले भी wheat, pulses आदि के माल के परिवहन और कंटेनर/सामान की हैंडलिंग में उपयोग देखा। �
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📅 वर्तमान स्थिति (2025-26)
⚠️ संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रतिबंध असर
अमेरिकी प्रतिबंध और छूट:
– संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान पर प्रतिबंधों के कारण पहले छूट दी थी जिससे भारत की चाबहार परियोजना सुरक्षित रहती थी — यह छूट 26 अप्रैल 2026 तक मान्य है। �
– भारत और अमेरिका इस पर सक्रिय कूटनीतिक बातचीत कर रहे हैं ताकि इसके बाद भी भारत की भागीदारी बनी रहे। �
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The Economic Times +1
राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियाँ:
– ईरान में राजनीति और सामाजिक अस्थिरता बढ़ने के कारण परियोजना की चुनौतियाँ बढ़ी हैं। �
– कुछ मीडिया रिपोर्टें यह दावा करती हैं कि भारत ने संचालन या निवेश को कम करने या समायोजित करने की कोशिश की है, लेकिन भारत ने इन बातों का खंडन किया है। �
Navbharat Times
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भारत की प्रतिबद्धता:
– भारत ने स्पष्ट कहा है कि चाबहार प्रोजेक्ट को छोड़ना विकल्प नहीं है और वह इसे जारी रखने के उपाय ढूँढ रहा है। �
– अफ़ग़ानिस्तान के प्रतिनिधियों ने भी भारत को इस पोर्ट के उपयोग और व्यापार को बढ़ाने का आग्रह किया है। �
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📌 रणनीतिक और आर्थिक महत्त्व — संक्षेप
✅ पाकिस्तान बाइपास: सीधे अफ़ग़ानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुँच। �
✅ INSTC का हिस्सा: भारत-रूस-यूरोप कनेक्टिविटी मजबूत। �
✅ रणनीतिक संतुलन: पाकिस्तान-चीन के Gwadar पोर्ट के विकल्प के रूप में। �
✅ व्यापार और माल ढुलाई: माल की लागत और समय कम करता है। �
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Navbharat Times
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🧠 निष्कर्ष
इतिहास में, भारत-ईरान ने चाबहार पोर्ट को अपने रणनीतिक सहयोग और आर्थिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना।
वर्तमान में, भू-राजनीतिक दबाव, अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरान की अस्थिरता के बावजूद भारत इस पोर्ट पर अपनी भागीदारी बचाने का प्रयास कर रहा है, क्योंकि यह रणनीतिक रूप से भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत का ईरान से तेल ख़रीदना बंद क्यों किया?

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